भारत की गणना

 🇮🇳भारत की गणना 


❤️1 सेनापति के नीचे = 1100 सैनिक 

1 पद्म = 1000000000000000

🙏अब श्रीराम सेना में 18 पद्म तो सिर्फ सेनापति हैं 


तो गुणा-भाग कर लो कि भगवान श्रीराम की सेना कितनी विशाल होगी


रावण ने श्रीराम जी की सेना का भेद जानने के लिए जो गुप्तचर भेजे थे, उनका और रावण का संवाद इस प्रकार है।


चौपाई:

अस मैं सुना श्रवन दसकंधर। पदुम अठारह जूथप बंदर॥

नाथ कटक महँ सो कपि नाहीं। जो न तुम्हहि जीतै रन माहीं॥2॥


भावार्थ: -हे दशग्रीव! मैंने कानों से ऐसा सुना है कि अठारह पद्म तो अकेले वानरों के सेनापति हैं। हे नाथ! उस सेना में ऐसा कोई वानर नहीं है, जो आपको रण में न जीत सके॥2॥


चौपाई:

परम क्रोध मीजहिं सब हाथा। आयसु पै न देहिं रघुनाथा॥

सोषहिं सिंधु सहित झष ब्याला। पूरहिं न त भरि कुधर बिसाला॥3॥


भावार्थ: -सब के सब अत्यंत क्रोध से हाथ मीजते हैं। पर श्री रघुनाथजी उन्हें आज्ञा नहीं देते। वे कह रहे हैं हम मछलियों और साँपों सहित समुद्र को सोख लेंगे। नहीं तो बड़े-बड़े पर्वतों से उसे भरकर पूर (पाट) देंगे॥3॥


चौपाई:

मर्दि गर्द मिलवहिं दससीसा। ऐसेइ बचन कहहिं सब कीसा॥

गर्जहिं तर्जहिं सहज असंका। मानहुँ ग्रसन चहत हहिं लंका॥4॥


भावार्थ: -और रावण को मसलकर धूल में मिला देंगे। सब वानर ऐसे ही वचन कह रहे हैं। सब सहज ही निडर हैं, इस प्रकार गरजते और डपटते हैं मानो लंका को निगल ही जाना चाहते हैं॥4॥


दोहा :

सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम।

रावन काल कोटि कहुँ जीति सकहिं संग्राम॥55॥


भावार्थ: -सब वानर-भालू सहज ही शूरवीर हैं फिर उनके सिर पर प्रभु (सर्वेश्वर) श्री रामजी हैं। हे रावण! वे संग्राम में करोड़ों कालों को जीत सकते हैं॥55॥


जय सियाराम जय जय श्रीराम 

जय हनुमान जय हनुमान 

मंगल ही मंगल जय श्रीराम




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